- इजरायल का बड़ा हमला
- ईरान ने 14 वें दिन दिया ताबड़तोड़ जवाब
- भारत पाकिस्तान में हालात बुरे
- सुरक्षा परिषद का निंदा प्रस्ताव बना गले की हड्डी
- ओमान के सुल्तान की ईरानी राष्ट्रपति से बात
- खाड़ी देशों में तीन स्तरों पर गुस्सा
- ईरान की जवाबी कार्रवाई को जबरदस्त घरेलू समर्थन
- कतर और ओमान पर सबकी निगाह
- आसमान छू रही तेल की कीमतें
नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली
अमेरिकी सेना ने स्वीकार किया है कि गुरुवार को इराक में एक अमेरिकी ईंधन भरने वाले विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से उसमें सवार सभी छह सैनिक मारे गए। अमेरिका ने कहा कि यह घटना दुश्मन की गोलीबारी के कारण नहीं हुई थी, लेकिन ईरान के एक समर्थक समूह ने इसकी जिम्मेदारी ली है। ईरान युद्ध के सिलसिले में कम से कम 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं।
गल्फ सहयोग परिषद GCC के सदस्य देश कुवैत, सऊदी अरब, बहरीन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ओमान, अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को जल्द समाप्त करने की मांग कर रहे हैं।
यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ और अब इसका 14 वाँ दिन चल रहा है। ये देश आमतौर पर क्षेत्रीय संघर्षों से दूर रहते हैं, लेकिन अब ईरान के हमलों का सामना कर रहे हैं, जिसमें उनके क्षेत्र में अमेरिकी बेस, राजनयिक ठिकाने, तेल सुविधाएँ, मीठे पानी के स्रोत, हवाई अड्डे, होटल और शॉपिंग मॉल पर सस्ते एकतरफा ड्रोन और मिसाइल हमले शामिल हैं।
इजरायल का बड़ा हमला
इजरायल ने राजधानी तेहरान पर भीषण हवाई हमले किए हैं, जिसमें सुरक्षा चौकियों और सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। तेहरान में एक सरकारी रैली के पास भी धमाके हुए हैं। इसके अलावा शिराज (मिसाइल केंद्र), बंदर अब्बास, और देज़फ़ुल के सैन्य ठिकानों पर भी हमले हुए हैं।
ईरान ने 14 वें दिन दिया ताबड़तोड़ जवाब
ईरान ने इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलों की नई लहर छोड़ी है। उत्तरी इजरायल के ज़रज़ीर में मिसाइल गिरने से घर तबाह हुए हैं और मध्य इजरायल में भी तीन जगह मिसाइलें गिरी हैं।
इराक में एक अमेरिकी KC-135 टैंकर विमान क्रैश हो गया । हालांकि अमेरिका ने इसे तकनीकी खराबी बताया है, वहीं इराकी गुटों ने इसे गिराने का दावा किया है। अमेरिकी नौसेना ने तुर्की के ऊपर ईरानी मिसाइलों को इंटरसेप्ट भी किया है।
इसके अलावा, ईरान समर्थित गुटों ने दुबई और सऊदी अरब की तेल रिफाइनरियों जैसे रास तनुरा पर ड्रोन हमले किए हैं।
भारत पाकिस्तान में हालात बुरे
ईरान ने कुछ क्षेत्रों में संयम बरता है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल यातायात रोककर वैश्विक ऊर्जा बाजार को बाधित किया है। ईरान और बहरीन में डिसैलिनेशन प्लांट्स पर हमले हुए हैं।
इधर भारत, पाकिस्तान समेत दक्षिण एशिया के कई देशों में गंभीर संकट पैदा हो गया है। तेल और गैस की कमी से जन जीवन अस्त व्यस्त है।
सुरक्षा परिषद का निंदा प्रस्ताव बना गले की हड्डी
GCC ने संयुक्त राष्ट्र में 135 देशों को एकजुट कर ईरान के जवाबी हमलों की निंदा की और बुधवार को यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में प्रस्ताव पारित करवाया, जिससे ईरान अलग-थलग पड़ गया।
कतर और ओमान, जो ऐतिहासिक रूप से तेहरान से निकट हैं, कूटनीति की वकालत कर रहे हैं। कतर के प्रवक्ता माजेद अल-अंसारी ने कहा: “ईरानी नेतृत्व को हमारा संदेश है कि आपने क्षेत्र को युद्ध में घसीटकर इसका अंत ढूंढने की कोशिश की है, लेकिन आप इसके ठीक उलट कर रहे हैं। हमें शांति से साथ रहने का रास्ता ढूंढना होगा, और हमें धमकाना आपकी स्थिति में मदद नहीं करेगा।”
गौरतलब है कि इस कवायद में भारत सह प्रायोजक था हांलाकि भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पिछले तीन दिनों में अपने ईरानी काउंटर पार्ट से तीन बार बात की है।
ओमान के सुल्तान की ईरानी राष्ट्रपति से बात
ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से बात की और “संवाद और कूटनीति की भाषा” की अपील की, साथ ही सलालाह पोर्ट में ईरानी ड्रोन हमले की निंदा की।
खाड़ी देशों में तीन स्तरों पर गुस्सा
खाड़ी देशों में गुस्सा तीन स्तरों पर है: ईरान के खिलाफ क्रोध, वाशिंगटन से निराशा जिसने युद्ध शुरू किया, और इज़राइल पर गहरा संदेह जो अब क्षेत्रीय अस्थिरता का स्रोत बन गया है।
विशेषज्ञ हुसैन इबिश ने कहा: “खाड़ी में मूड तीन परतों का है—पहला ईरान के खिलाफ गुस्सा, दूसरा वाशिंगटन से निराशा, तीसरा इज़राइल के क्षेत्रीय एजेंडे पर गहरा संदेह।”युद्ध से खाड़ी देशों को कोई फायदा नहीं दिख रहा। अमेरिकी लक्ष्य पूरे नहीं हो रहे, हमलों से लागत बढ़ रही है, और कोई स्पष्ट अंत नहीं।
यास्मीन फारूक ने कहा: “अब कई अंतिम परिदृश्य युद्ध से ज्यादा महंगे साबित हो रहे हैं जितना ईरान से बातचीत से मिल सकता था।”
ईरान की जवाबी कार्रवाई को जबरदस्त घरेलू समर्थन
सैन्य रूप से अमेरिका-इज़राइल ने ईरान की एयर डिफेंस, नौसेना और वरिष्ठ नेतृत्व को कमजोर किया है, लेकिन ईरान के जवाबी हमलों ने घरेलू समर्थन बढ़ाया और क्षेत्र में तबाही मचाई।
व्हाइट हाउस ने कहा कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमले 90 फीसदी कम हो गए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप मध्य पूर्वी साझेदारों से संपर्क में हैं और ईरानी खतरे को खत्म करने पर जोर दे रहे हैं।
जॉर्डन, सऊदी अरब, UAE, कतर, बहरीन और कुवैत अमेरिका को एयर डिफेंस और ऑपरेशनल सपोर्ट दे रहे हैं।
कतर और ओमान पर सबकी निगाह
कतर और ओमान ईरान से मध्यस्थता कर सकते हैं, क्योंकि “ईरान को उनकी अब ज्यादा जरूरत है”। खाड़ी देश हमलों में शामिल नहीं हो रहे और जवाबी कार्रवाई नहीं करना चाहते। वे आर्थिक दबाव डाल रहे हैं—अमेरिकी निवेश वापस लेने की धमकी देकर अपना बचाव मजबूत करने के लिए फंड जुटा रहे हैं।
लंबे समय में वे चीन, रूस, यूरोप से संबंध बढ़ा सकते हैं, हथियार विविधीकृत कर सकते हैं।
आसमान छू रही तेल की कीमतें
ईरान का संवर्धित यूरेनियम स्टॉकपाइल नागरिक ठिकानों पर हमले युद्ध को बढ़ावा दे रहे हैं। फिलहाल हॉर्मिज जलडमरूमध्य बंद है, तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल पार कर गई हैं, और खाड़ी देश कूटनीति से युद्ध खत्म करवाना चाहते हैं।
इंसिरलिक (तुर्की) पर ईरानी मिसाइलें नाटो द्वारा रोकी गईं, लेकिन कोई सीधा हमला सफल नहीं हुआ। यह एक नाभिकीय बेस है। क्षेत्रीय तनाव बहुत उच्च स्तर पर है।


