रायपुर। CG: पूर्व संसदीय सचिव एवं छाया सांसद विकास उपाध्याय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में फिर मुख्यमंत्री के ऊर्जा विभाग के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हुआ है। उपाध्याय ने बताया कि छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर विद्युत टेंडर घोटाला सामने आ रहा है, कई घोटाले की जाँच में आरोप सिद्ध भी पाये गये हैं फिर भी संबंधित अधिकारी अभी तक अपनी कुर्सी पर बैठे हुये हैं। उपाध्याय ने बताया कि ऊर्जा विभाग के 112 से ज्यादा टेंडरों में गड़बड़ी पाई गई है, जिसमें पूरी तरीके से जाँच भी नहीं हो रही है और कुछ गड़बड़ टेंडरों के जाँच में आरोप सिद्ध भी हो गये हैं तो किसी पर भी कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के नगर वृत्त वन कार्यालय में कुल 112 टेंडर में गड़बड़ी बताई गई है, जिसमें विद्युत विभाग को करोड़ों से ज्यादा का नुकसान होना पाया गया है, लेकिन अफसरों ने सिर्फ 12 टेंडर की जाँच की है, यानी यदि सभी टेंडरों की जाँच की जायेगी तो और भी ज्यादा नुकसान बिजली विभाग में पाया जायेगा। अब ऐसे में सरकार बिल्कुल मौन रूप धारण करे बैठी है और किसी भी दोषी अधिकारी पर अब तक कोई प्रकार की कार्यवाही नहीं की है। टेंडर चहेते ठेकेदारों से लगवाए जा रहे हैं और उदाहरण के तौर पर मात्र ट्रांसफार्मर 10 लाख का काम 12 लाख में करवाया गया तो सोचिये फिर पूरे विद्युतीय उपकरणों की हेरा-फेरी में कितने करोड़ों-अरबों का नुकसान हुआ होगा, खैर ये तो जाँच के पश्चात् ही पता चल पायेगा। लेकिन विद्युत विभाग को मिले फण्ड में जो बड़े भ्रष्टाचार का खेल छत्तीसगढ़ में चल रहा है, उसमें भ्रष्ट अधिकारियों के साथ सत्ताधारी भाजपा नेता भी शामिल हैं, तभी तो किसी भी भ्रष्ट अधिकारी के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं हो रही।
विकास ने बताया कि भ्रष्टाचार मामले की जानकारी के अनुसार चार ठेकेदार व अफसर बैठ कर ये तय करते थे कि कौन से टेंडर में किसको कितनी बिड भरना है। इसी के आधार पर मनमाने तरीके से सबको अलग-अलग महीने का टेंडर दिया जाता था और ये सभी प्रक्रियाओं को पूरे तरीके से सिंडिकेट बनाकर काम करवाये जा रहा थे।

उपाध्याय ने कुछ दिन पहले और ऊर्जा विभाग में मिले गड़बड़ी की जानकारी जनता के सामने रखी थी जिसमें निविदा क्रमांक-1 उच्चदाब लाइन, ट्रांसफार्मर व निम्न दाब लाइन विस्तार के लिए परसुराम चौक, विप्र नगर, वार्ड 69 रायपुरा में निविदा क्र. टीआर नंबर 2025-20, जारी दिनांक 4 मई 2025 की जांच में पाया गया कि ऑनलाइन प्रक्रिया में प्राप्त तीन बिड में से एक ठेकेदार की तकनीकी बिड बिना पर्याप्त कारण निरस्त कर दी गई। इससे प्रतिस्पर्धा कम हो गई। बाद में मेसर्स रूद्रा इंटरप्राइजेस कबीर नगर को 3.5 प्रतिशत अधिक लाभ दर पर कार्यादेश जारी किया गया, इसे ठेकेदार को अवांछित लाभ पहुंचाना माना गया है। निविदा क्र. 2 में मुस्कान प्रोविजन स्टोर के सामने, नयापारा में 315 केवीए डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर का स्थानांतरण करने के लिए निविदा क्र. टीआर 2025-17, दिनांक 4 मई 2025 को जारी की गई। इसमें चार बिड प्राप्त हुई, जिसमें भी जांच पश्चात् इसे नियम विरूद्ध और कंपनी के हितों के विपरीत बताया गया। निविदा क्र.3 में मेसर्स समर्थ फूड एंड बेवरेज, रावणभाटा जोन रायपुर में निम्न दाब विद्युत कनेक्शन की भार वृद्धि (25 एचपी से 110 एचपी) के लिए निविदा क्र. टीआर 2025-18 दिनांक 4 मई 2025 को जारी की गई, यहाँ भी जांच रिपोर्ट में इसे अधिकारों का दुरूपयोग माना गया है और निविदा क्र.4 में अवंति विहार, कविता नगर, निरंकारी फर्निचर, अशोका विहार में 11 केवी फीडरों का इंटरकनेक्शन के लिए निविदा क्र. टीआर 2025-19, दिनांक 4 मई 2025 को जारी की गई, इसके जांच में भी इसे वित्तीय अनुशासन के विपरीत माना गया है। आरडीएस योजना में 35 करोड़ का भ्रष्टाचार उजागर हुआ है जिसकी शिकायत स्वयं भाजपा विधायक ने मुख्यमंत्री से की है। भाजपा विधायक द्वारा आरोप लगाया गया है कि फर्जी बिलिंग कर घटिया सामग्री सप्लाई कर 35 करोड़ की अधिक की गड़बड़ी की गई थी और इन सब में प्रक्रियाओं का उल्लंघन भी किया गया था।
विकास ने कहा कि चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए निविदा शर्तों में बदलाव किये जा रहे हैं। बगैर टेंडर निकाले चहेते ठेकेदारों को ही काम दे दिये जा रहे हैं, इन सब में बड़ा कमिशन का खेल हो रहा है। शिकायत के आधार पर 15 निविदाओं की जांच में पाया गया कि तत्कालीन अधीक्षण यंत्री द्वारा अपने पद का दुरूपयोग करते हुए नोटशीट में बिड की संख्या की गलत जानकारी देते हुए स्वीकृत राशि से अधिक दर पर चहेते ठेकेदारों को वर्कऑर्डर जारी कर दिया गया। ई बिडिंग पोर्टल बिड में निविदा शुल्क जमा नहीं किए जाने का उल्लेख करते हुए टेक्निकल बिड को निरस्त किया गया, जबकि इससे संबंधित कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा सुरक्षा निधि एवं ईएमडी राशि की वापसी की कार्यवाही ठेकेदारों द्वारा आवेदन जमा करने के पश्चात् भी नहीं की गई। बगैर तर्कसंगत कारणों के अनावश्यक रूप से लंबित रखकर कंपनी की छवि धूमिल की। डीओपी में प्रदत्त सामग्री क्रय की, जिसके जाँच में सीमा से अधिक राशि का क्रय किया जाना पाया गया था।
उपाध्याय ने वर्ष 2024 गुढ़ियारी इलाके में हुए विद्युत कंपनी में आगजनी के बारे में बताया कि गुढ़ियारी स्थित बिजली कंपनी सीएसपीडीसीएल के मुख्य गोडाउन में आग लगने से चार हजार ट्रांसफार्मर, मीटर, कंडक्टर, वायर और ऑयल जलकर खाक हो गये थे और विभाग द्वारा बताया गया कि इस घटना में 400 करोड़ रूपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है, जिसकी जाँच रिपोर्ट में किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया, जबकि शासन को इतना बड़ा राजस्व हानि हुआ है जिस पर जवाबदारी तय नहीं हुई। इसमें भी दोषी अधिकारियों को सत्ताधारी लोगों द्वारा ही बचाया जा रहा है और कमीशन के रूप में बंदरबांट जारी है।


