दिल्ली। ईरान की राजधानी तेहरान समेत देशभर में सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है। हालात बिगड़ते देख ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई द्वारा सुरक्षा बलों को सख्त कार्रवाई के आदेश दिए जाने की खबर है। इन कार्रवाइयों में 200 से अधिक प्रदर्शनकारियों के मारे जाने का दावा किया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता गहराती जा रही है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, तेहरान के कम से कम छह अस्पतालों में 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है। एक स्थानीय डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अधिकतर मौतें गोली लगने से हुई हैं। मृतकों में बड़ी संख्या युवाओं की बताई जा रही है। उत्तरी तेहरान के एक पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन के दौरान मशीन गन से की गई फायरिंग में कई लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
हालांकि, वाशिंगटन डीसी स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी ने अब तक 63 मौतों की ही स्वतंत्र पुष्टि की है। एजेंसी का कहना है कि वह केवल उन मामलों को गिनती है, जिनकी पहचान और तथ्यात्मक पुष्टि हो चुकी हो।
इंटरनेट बंद, आंकड़ों पर संदेह
गुरुवार रात से ईरान के कई हिस्सों में इंटरनेट और फोन सेवाएं लगभग पूरी तरह बंद हैं। इसी कारण मौतों के वास्तविक आंकड़ों को लेकर असमंजस बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि संचार बंदी से हालात की गंभीरता छिपाने की कोशिश की जा रही है।
ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि यदि ईरान सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाती है, तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। हालिया घटनाक्रम ट्रंप की इस चेतावनी के लिए सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप ने दो टूक कहा है कि अमेरिका निर्दोष प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा को बर्दाश्त नहीं करेगा।
ईरान का पलटवार
ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई ने ट्रंप के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस्लामिक गणराज्य किसी बाहरी दबाव में नहीं झुकेगा। सरकारी टीवी पर रिवोल्यूशनरी गार्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा तक का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को सड़कों से दूर रखने की अपील करते हुए कहा, “अगर गोली लग जाए, तो शिकायत मत करना।”




