पिंटू दुबे, बिलासपुर। CG News : अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव का असर अब स्थानीय स्तर पर भी गहराने लगा है। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में इन दिनों कमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत देखी जा रही है, जिसने शहर के होटल और ढाबा संचालकों की कमर तोड़ दी है। गैस की सप्लाई बाधित होने से हालात इतने चुनौतीपूर्ण हो गए हैं कि व्यवसायियों को अपनी रसोई चालू रखने के लिए अब आधुनिक गैस बर्नर छोड़कर पारंपरिक चूल्हों का सहारा लेना पड़ रहा है।
बिलासपुर शहर के व्यावसायिक हलकों में इन दिनों गैस संकट का असर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। जिन होटलों और ढाबों की रसोइयों में पहले आधुनिक गैस चूल्हों की नीली लौ जलती थी, वहां अब लकड़ी और कोयले के धुएं ने अपनी जगह बना ली है। हमारी टीम ने जब शहर के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों और बाहरी इलाकों के ढाबों का जायजा लिया, तो बेहद चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आईं। गैस की किल्लत से पार पाने के लिए ढाबा संचालकों ने अब जुगाड़ की तकनीक अपना ली है; लोहे के ड्रमों को काटकर देसी बर्नर तैयार किए जा रहे हैं और आग की लपटों को तेज करने के लिए उनमें इलेक्ट्रिक ब्लोअर या पंखे लगाए जा रहे हैं। होटल संचालकों का साफ कहना है कि उन्हें समय पर कमर्शियल सिलेंडरों की डिलीवरी नहीं मिल रही है, और चूंकि वे अपना कारोबार बंद नहीं कर सकते, इसलिए मजबूरी में उन्हें इसी पुराने और श्रमसाध्य तरीके से खाना बनाना पड़ रहा है।

गैस की तुलना में इन पारंपरिक और जुगाड़ वाले चूल्हों पर खाना तैयार करना न केवल समय की बर्बादी है, बल्कि इससे कर्मचारियों की मेहनत भी कई गुना बढ़ गई है। कोयले और लकड़ी की आंच को नियंत्रित करना मुश्किल होता है, जिससे खाने की गुणवत्ता और समय पर डिलीवरी दोनों प्रभावित हो रही हैं। होटल मालिकों और कर्मचारियों का दर्द है कि इस संकट ने उनके मुनाफे को तो कम किया ही है, साथ ही धुएं के कारण स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि अंतरराष्ट्रीय कारणों से उपजी यह गैस सप्लाई की समस्या जल्द सामान्य नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है। इसका सीधा असर खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे आम जनता की जेब ढीली होगी। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस संकट से निपटने के लिए क्या वैकल्पिक कदम उठाता है या फिर बिलासपुर की रसोई इसी तरह ‘जुगाड़’ के भरोसे धुएं में घिरी रहेगी।

