लेंस डेस्क। PM Modi Israel visit: पीएम मोदी के इजरायल दौरे के पहले दिन संसद में उनके संबोधन से पहले विपक्षी सांसदों ने बहिष्कार कर दिया। खाली सीटों को भरने के लिए पूर्व सांसदों को बुलाया गया। विपक्षी सांसदों ने बहिष्कार की घोषणा पहले ही कर दी थी क्योंकि नेसेट स्पीकर अमीर ओहाना ने सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष जस्टिस इसहाक अमित को इस समारोह में आमंत्रित नहीं किया, जो आम तौर पर प्रोटोकॉल के अनुसार होता है।
इससे पहले यरूशलेम में बेन गुरियन हवाई अड्डे पर उनका स्वागत प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा ने किया। यह दौरा रक्षा, तकनीक, नवाचार और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने का महत्वपूर्ण कदम है।
हालांकि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का भाषण खत्म होने के बाद विपक्षी सांसदों ने दोबारा नेसेट में प्रवेश किया। विपक्ष के नेता यायर लैपिड ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाथ मिलाया और संसद में उनका स्वागत किया।

THE TIMES OF ISRAEL के मुताबिक येश अटिद और यिसराएल बेयतेनु जैसी पार्टियों ने बयान जारी कर कहा कि ओहाना का यह “शर्मनाक” कदम है, जो सभी परंपराओं के खिलाफ है। वे इस बहिष्कार में शामिल नहीं होना चाहते, इसलिए बाहर चले गए। हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि वे सिर्फ मोदी के भाषण के लिए वापस आएंगे, ताकि भारत-इज़राइल के बीच मजबूत संबंधों का सम्मान हो सके और मोदी के इज़राइल के प्रति समर्थन की सराहना की जा सके।
बेनी गैंट्ज की ब्लू एंड व्हाइट पार्टी ने थोड़ा अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ओहाना की “उकसावे वाली” हरकत के बावजूद उनके सांसद मोदी के भाषण में जरूर शामिल होंगे, लेकिन स्पीकर ओहाना के संबोधन में नहीं। पार्टी ने चेतावनी दी कि अगली सरकार में ऐसे अतिवाद को रोका जाएगा और इज़राइल को बहिष्कारों की बजाय समझौतों की राह पर ले जाया जाएगा।
PM Modi Israel visit: प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने क्या कहा?

विपक्षी सांसदों के विरोध और बहिष्कार के बावजूद हुए विशेष सत्र में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मोदी को “प्रिय मित्र” और लगभग “भाई” कहकर संबोधित किया। उन्होंने दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग, व्यापार में बढ़ोतरी और आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई की तारीफ की।
नेसेट स्पीकर अमीर ओहाना ने मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मोदी 2017 में इज़राइल आने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री थे और अब नेसेट को संबोधित करने वाले पहले भारतीय नेता बनकर इतिहास रच रहे हैं।
ओहाना ने भारत को दुनिया की सबसे बड़ी लोकतंत्र कहा और मोदी की नेतृत्व क्षमता की प्रशंसा की, जो भारत को बदल रहे हैं। उन्होंने दोनों देशों के बीच सदियों पुराने संबंध, यहूदियों को शरण देने की इतिहास, आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता और 7 अक्टूबर के हमास हमले के बाद मोदी के समर्थन का जिक्र किया।
विपक्ष के बहिष्कार से कक्ष खाली न हो, इसलिए ओहाना ने पूर्व सांसदों को बुलाया । उन्होंने व्यक्तिगत फोन कॉल्स और ईमेल से उन्हें आमंत्रित किया, ताकि मोदी का भाषण खाली कुर्सियों के बीच न हो।
पीएम मोदी ने नेसेट को किया संबोधित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायली संसद नेसेट में भाषण देने वाले पहले भारतीय पीएम बने हैं। उन्होंने 7 अक्टूबर को हमास के आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। इसे बर्बर करार देते हुए कहा कि ऐसे किसी भी आतंकवाद को किसी भी आधार पर जायज नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति भारत के 140 करोड़ नागरिकों की ओर से गहरी संवेदना व्यक्त की और कहा, “हम आपके दर्द को महसूस करते हैं, आपके दुख में शामिल हैं। भारत आज और आने वाले कल में भी पूरे विश्वास और मजबूती के साथ इजरायल के साथ खड़ा रहेगा।”
पीएम मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता की जरूरत पर जोर दिया और निर्दोष नागरिकों पर हमले को कभी बर्दाश्त नहीं किए जाने की बात दोहराई। उन्होंने भारत-इजरायल संबंधों को मित्रता, सम्मान और साझेदारी की मजबूत नींव पर टिका बताया। उन्होंने कहा कि उनका जन्म उसी दिन हुआ था, जिस दिन भारत ने इजरायल को औपचारिक रूप से मान्यता दी थी 17 सितंबर 1950 को।

