आम लोगों की आजादी छीन लेगा अमीरों का राज

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लेंस डेस्‍क। Oxfam International report: अंतरराष्ट्रीय अधिकार संगठन ऑक्सफैम ने अपनी नई रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर अरबपतियों के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया है, लेकिन भारत में संविधान द्वारा दिए गए आरक्षण की व्‍यवस्‍था की तारीफ भी की है।

विश्व आर्थिक मंच (दावोस) की वार्षिक बैठक के उद्घाटन के साथ जारी रिपोर्ट “Resisting the Rule of the Rich: Protecting Freedom from Billionaire Power” में कहा गया है कि अरबपति सामान्य नागरिकों की तुलना में 4,000 गुना अधिक राजनीतिक पदों पर पहुंचने की संभावना रखते हैं, जिससे राजनीतिक असमानता गहरा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार 2025 में अरबपतियों की कुल संपत्ति रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचकर 18.3 ट्रिलियन डॉलर हो गई, जो पिछले पांच वर्षों की औसत वृद्धि दर से तीन गुना तेज रही। इस दौरान अरबपतियों की संख्या पहली बार 3,000 से अधिक हो गई। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यह आर्थिक असमानता सीधे राजनीतिक सत्ता पर कब्जे में तब्दील हो रही है, जिसे “ओलिगार्की” (मुट्ठी भर अमीरों का राज) का रूप दिया जा रहा है।

ऑक्सफैम ने भारत की आरक्षण प्रणाली को लोकतंत्र में सशक्तिकरण का एक ठोस और प्रभावी उदाहरण करार दिया है। रिपोर्ट में भारतीय संविधान निर्माताओं के दूरदर्शी फैसले की सराहना की गई है, जिसमें दलितों, आदिवासियों और अन्य पिछड़े वर्गों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया। इसे “संस्थागत समावेशिता” का मॉडल बताया गया है, जो राजनीतिक शक्ति को लोकतांत्रिक तरीके से वितरित करने का एक सफल तरीका है।

रिपोर्ट में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के जज लुइस ब्रैंडीज के 100 साल पुराने बयान को कोट किया गया है, “हमें अपनी पसंद चुननी होगी  या तो कुछ लोगों के हाथों में असीमित संपत्ति, या लोकतंत्र। दोनों एक साथ नहीं चल सकते।”

रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 12 सबसे अमीर अरबपतियों की संपत्ति गरीब आधी आबादी (लगभग 4 अरब लोग) से अधिक है। 2025 में अरबपतियों की कमाई से हर व्यक्ति को 250 डॉलर (लगभग 20,000 रुपये) दिए जा सकते थे, फिर भी वे अरबों डॉलर अमीर रहते।

अरबपतियों के सत्ता हथियाने के तरीके

चुनावों में भारी फंडिंग और लॉबिंग: अरबपति राजनीतिक दलों को करोड़ों-खरबों का चंदा देते हैं, बदले में नीतियां उनके हित में बनती हैं (जैसे टैक्स छूट, डेरगुलेशन)।

मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर नियंत्रण: कई अरबपति मीडिया हाउस और सोशल मीडिया कंपनियों के मालिक हैं, जिससे वे जनमत को प्रभावित करते हैं और विपरीत आवाजों को दबाते हैं।

सीधे सत्ता में भागीदारी : अरबपति सलाहकार, मंत्री या अन्य पदों पर पहुंचते हैं और योजनाओं को अपने ढंग से तैयार करवाते हैं। जैसा कि अमेरिका में 2025 के बाद एलन मस्क जैसे व्यक्तियों की सक्रिय भूमिका का जिक्र इस रिपोर्ट में किया गया है।

भारत में असमानता और सकारात्मक पक्ष

भारत में भी गरीबी-अमीरी की खाई गहरी है। करोड़ों लोग भूख, बेरोजगारी और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से जूझ रहे हैं। रिपोर्ट में पीएमजेएवाई जैसी योजनाओं का जिक्र है, जहां प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ रही है, लेकिन महिलाओं पर देखभाल और खर्च का बोझ अधिक पड़ रहा है। फिर भी ऑक्सफैम ने भारत की आरक्षण व्यवस्था को राजनीतिक समानता लाने का मिसाल बताया है, जो पिछड़े वर्गों को सत्ता में जगह देती है और असमानता के खिलाफ एक मजबूत हथियार साबित हुई है।

अगर यह रुझान जारी रहा तो लोकतंत्र कमजोर होगा। असमान देशों में लोकतांत्रिक क्षरण का खतरा 7 गुना अधिक है। सरकारें असमानता के खिलाफ प्रदर्शनों को दबा रही हैं, जबकि अमीरों की सत्ता मजबूत हो रही है।

रिपोर्ट के अंतिम अध्याय में समाधान सुझाए गए हैं। अमीरों पर प्रभावी टैक्स, राजनीतिक फंडिंग पर रोक, मीडिया स्वतंत्रता सुनिश्चित करना और आम लोगों की आवाज मजबूत करना। भारत जैसी आरक्षण जैसी नीतियां रिडिस्ट्रीब्यूशन और राजनीतिक समानता के अच्छे उदाहरण हैं।

ऑक्सफैम की यह रिपोर्ट चेतावनी देती है कि लोकतंत्र बचाने के लिए अमीरों की राजनीतिक ताकत को सीमित करना जरूरी है, वरना “अमीरों का राज” आम लोगों की आजादी छीन लेगा।



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