आम खाने से पहले होती है ‘आमाजोगानी’ पूजा

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 भण्डारीन माता मंदिर में विधि-विधान से हुई पूजा, 9 परगना 12 पाली के

पुजारी-गायता रहे शामिल, महिलाओं का प्रवेश वर्जित

-प्रकाश नाग

केशकाल, 22 मार्च(‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)। बस्तर अंचल अपनी समृद्ध आदिवासी परंपरा, वेशभूषा और संस्कृति के लिए देशभर में विशिष्ट पहचान रखता है। यहां हर पर्व और फल-फूल से जुड़ी मान्यताएं प्रकृति और आस्था से गहराई से जुड़ी हुई हैं। ऐसी ही एक अनूठी परंपरा है ‘आमाजोगानी’, जिसमें आम फल को खाने से पहले विधि-विधान से पूजा कर इष्ट देव को समर्पित किया जाता है। चैत्र शुक्ल पक्ष में हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ेराजपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत छिंदली स्थित भण्डारीन माता मंदिर प्रांगण में ‘आमाजोगानी’ पर्व का पहला आयोजन किया गया।

इस विशेष अवसर पर क्षेत्र के विभिन्न समाजों के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। परंपरा के अनुसार मंदिर प्रांगण में महिलाओं का प्रवेश पूर्णत: वर्जित रहता है।

मिट्टी के किलेनुमा में विराजमान है भण्डारीन माता, साल

में एक बार ही खुलता है

‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा करते हुए गांव के प्रमुख सियान चमरूराम मरकाम ने बताया कि ग्राम छिंदली में वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है। मंदिर परिसर में स्थित मिट्टी के किलेनुमा संरचना में भण्डारीन माता विराजमान हैं, जिसे वर्ष में केवल एक बार ही खोला जाता है। इस दौरान मरकाम परिवार के पुजारी ही अंदर प्रवेश कर विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं और फिर इसे पुन: बंद कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि आदिकाल से चली आ रही इस परंपरा के तहत सबसे पहले यहीं आम फल की पूजा होती है, जिसके बाद ही पूरे क्षेत्र में आमाजोगानी पर्व मनाया जाता है और लोग आम का सेवन करते हैं।

बड़ेराजपुर ब्लॉक के छिंदली में वर्षों की मनाया जाता है आमाजोगानी पर्व

वहीं, मोहनलाल मरकाम ने बताया कि बड़ेराजपुर ब्लॉक के अंतर्गत 9 परगना और 12 पाली के सभी पुजारी, गायता और सियान इस आयोजन में शामिल होते हैं। इस परंपरा का निर्वहन पिछले पांच पीढिय़ों से अधिक समय से लगातार किया जा रहा है, जिसमें सभी विधि-विधान का विशेष ध्यान रखा जाता है। आमाजोगानी पर्व न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति के प्रति सम्मान को भी दर्शाता है।

मरकाम परिवार के ही पुजारी वर्षों से करते हैं पूजा

जी हां कई वर्षों से भण्डारीन माता के मंदिर में मरकाम परिवार के पुजारी ही पूजा-अर्चना करते हैं । इस पूजा में बड़ेराजपुर ब्लॉक के सभी पुजारी गायता शामिल होते हैं। साथ ही पूजा-अर्चना के बाद भंडारा का भी आयोजन होता है। इस दौरान मोहरी और बाजा की धुन से पूरा क्षेत्र गूंज उठता है ।



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