रायपुर| आम आदमी पार्टी (AAP) छत्तीसगढ़ ने आज प्रदेश कार्यालय में आयोजित बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस में विष्णुदेव साय सरकार पर छत्तीसगढ़ के जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों को आदिवासियों से जबरन छीनकर बड़े उद्योगपतियों जैसे जिंदल और अदानी को सौंपने का गंभीर आरोप लगाया। कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उत्तम जायसवाल ने कहा कि सरकार का यह ‘विकास’ मॉडल केवल मुट्ठी भर पूंजीपतियों और सत्ता में बैठे कुछ लोगों का फायदा पहुंचा रहा है, जबकि असल में दंतेवाड़ा, भानुप्रतापपुर, कोरबा, रायगढ़ और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में दशकों से खनिज दोहन हो रहा है, लेकिन वहां के लोगों को कोई असली विकास नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस लड़ाई को सिर्फ आदिवासियों की बताकर उन्हें विकास-विरोधी करार दे रही है, जबकि यह पूरे छत्तीसगढ़ की लड़ाई है और आदिवासियों को अलग-थलग करने की साजिश रची जा रही है।
प्रदेश उपाध्यक्ष एवं प्रवक्ता प्रियंका शुक्ला ने कई विशिष्ट मामलों का विस्तार से जिक्र किया, अमेरा में कोल बेरिंग एक्ट का हवाला देकर जबरन काम शुरू करना, तमनार के 14 गांवों में फर्जी जनसुनवाई, मुड़ा पार में जंगलों की कटाई, बैलाडीला में युवाओं का आक्रोश, और हसदेव अरण्ड में फर्जी ग्राम सभाओं के दस्तावेज। उन्होंने अनुसूचित जनजाति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि हसदेव में फर्जी जनसुनवाई के सबूत मिले हैं, फिर भी जांच नहीं हुई।
तमनार हिंसा में बुजुर्ग की जिंदल की कोयला गाड़ी से मौत के मामले को दबाने और पुलिस-किसानों को आमने-सामने करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार बड़े पूंजीपतियों के सामने नतमस्तक है और छत्तीसगढ़ को ‘कौड़ी के भाव’ बेच रही है। प्रदेश अध्यक्ष (यूथ विंग) इमरान खान ने चेतावनी दी कि यदि सरकार चंद पूंजीपतियों की दलाली बंद नहीं करती और जनता के साथ नहीं खड़ी होती, तो आप सरगुजा, अमेरा, तमनार, बैलाडीला आदि क्षेत्रों के आदिवासी, किसान और युवाओं को संगठित करके बड़े आंदोलन की ओर बढ़ेगी, जिसकी जानकारी जल्द मीडिया को दी जाएगी।
मीडिया प्रभारी मिहिर कुर्मी ने पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में ग्राम सभा की अनुमति के बिना कोई विकास कार्य न करने, तमनार हिंसा में न्यायिक जांच गठित करने और बैलाडीला में ग्राम सभा अनुमति के बिना खनन की अनुमति देने पर सवाल उठाए। प्रदेश अध्यक्ष (कर्मचारी विंग) विजय कुमार झा ने कहा कि हसदेव में 16 जनवरी को 5000 आम लोगों का विरोध, तमनार और बैलाडीला में भी इसी तरह का जन-आक्रोश दिख रहा है, सरकार नक्सलियों से बात करने को तैयार है, लेकिन जनता से क्यों नहीं?

