[ad_1]
वे फिर लौट आए हैं….! चौंकिए नहीं, बात कॉकरोच की नहीं हो रही है… बात हो रही है, देश के अरबपतियों की…. जी हां आपने ठीक सुना हम अरबपतियों की बात कर रहे हैं… देश के 224 अरबपतियों की कुल संपत्ति एक बार फिर एक ट्रिलियन डॉलर यानी दस खरब डॉलर को पार कर गई है।
आप खामखां इस एक ट्रिलियन डॉलर को रुपये में बदलने के लिए कैलकुटेर लेकर मत बैठ जाएं…क्योंकि क्या पता तब तक एक डॉलर सौ रुपये को पार कर जाए….और आपका गणित गड़बड़ा जाए।
इस सूची में शीर्ष पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुकेश अंबानी हैं। उनके बाद अडानी समूह के गौतम अडानी शामिल हैं।
यही नहीं, वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े अरबपति क्लब में भारत तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।
[embed]https://www.youtube.com/watch?v=fHVuVZrzwxY[/embed]
जाहिर है, उद्योगपतियों पर पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर नहीं पड़ा है। वैसे ही जैसे उन पर न तो नोटबंदी का असर हुआ था ना कोरोना महामारी का। महामारी में जब सारा देश जूझ रहा था, तब भी देश में अरबपतियों की संपत्ति खासी बढ़ गई थी। तब ऑक्सफैम की रिपोर्ट ने बताया था कि कैसे भारत में मार्च 2020 से नवंबर 2021 के बीच अरबपतियों की कुल संपत्ति ₹23 लाख करोड़ रूपये से बढ़कर ₹56 लाख करोड़ रूपये से ज्यादा हो गई थी। उस दौरान देश में अरबपतियों की संख्या 102 से बढ़कर 142 हो गई थी।
फोर्ब्स की सूची से पता चला कि 27 मई तक देश के अरबपतियों पर पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का कोई फर्क ही नहीं पड़ा है। बेशक कुछ समय के लिए भारत के अरबपतियों की कुल संपत्ति गिरकर 980 अरब डॉलर हो गई थी, लेकिन अब यह फिर एक ट्रिलियन डॉलर को पार कर गई है।
अरबपतियों की संपत्ति में यह इजाफा तब हुआ है, जब हमारे प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को फिजूलखर्ची रोकने के सात उपाय बताए हैं।
युद्ध शुरू होने के बाद से 14.2 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत 60 रुपये तक बढ़ चुकी है। उससे पहले 19 किलो वाले (व्यावसायिक) सिलेंडर की कीमत 993 रुपये बढ़ाई जा चुकी है। ये सिलेंडर हज़ारों ढाबों, छोटे भोजनालयों और चाय की दुकानों में इस्तेमाल होते हैं, जहां लाखों लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है।
बीते दिनों यह तस्वीरें भी आई ही हैं कि कैसे अनेक मज़दूर बढ़ती खाद्य कीमतों का सामना न कर पाने के कारण दूर-दराज़ के शहरों से बिहार और यूपी लौट चुके हैं या अभी लौट रहे हैं। प्रधानमंत्री ने जैविक खाद की बात करके यह संकेत दे ही दिए हैं कि आने वाले समय में देश के किसानों के सामने खाद का संकट भी पैदा हो सकता है।
साफ है कि, हम सब एक नाव में सवार नहीं हैं… संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरश की कोरोना महामारी के समय कही गई यह बात आज भी लागू होती है, जब ईरान पर इस्राइल और अमेरिका के हमले से पैदा हुए संकट में आम आदमी पर बोझ बढ़ गया है…और देश के अरबपतियों को कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा है, बल्कि उनकी संपत्ति बढ़ती ही जा रही है।
[ad_2]
Source link