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नई दिल्ली। अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए Hormuz स्ट्रेट पर नाकेबंदी लगाने का फैसला लिया है। पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता विफल होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह कड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार आज सोमवार को भारतीय समयानुसार दोपहर 2 बजे से ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने या वहां से आने वाले सभी जहाजों को रोका जाएगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इस नाकेबंदी का मुख्य उद्देश्य ईरान की तेल बिक्री को रोकना है। ट्रंप का दावा है कि ईरान की नौसेना लगभग समाप्त हो चुकी है और उसकी सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट में लगाई गई बारूदी सुरंगों को भी साफ करने की तैयारी कर रहा है।
ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर कोई ईरानी जहाज या बल अमेरिकी या शांतिपूर्ण जहाजों पर हमला करता है, तो उसे नरक में भेज दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक होर्मुज स्ट्रेट में निर्बाध नौवहन पूरी तरह बहाल नहीं हो जाता, नाकाबंदी जारी रहेगी।
अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों पर नाकेबंदी लागू करेगी। जो जहाज ईरान नहीं जा रहे हैं या ईरानी बंदरगाहों से नहीं आ रहे हैं, उन्हें होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने साफ किया है कि गैर-ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों की नौवहन स्वतंत्रता पर कोई रोक नहीं लगाई जाएगी।
नाकेबंदी की घोषणा के तुरंत बाद वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मच गया। ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट भी 104 डॉलर के स्तर के आसपास पहुंच गया। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के कुल तेल व्यापार का करीब 20% हिस्सा संभालता है इसलिए इस क्षेत्र में कोई भी अस्थिरता तेल की कीमतों को सीधे प्रभावित करती है।
अगर चीन ने ईरान को सैन्य मदद दी, तो अमेरिका चीन पर 50% तक भारी टैरिफ लगा सकता है। ट्रंप ने कहा कि कई अन्य देश भी इस प्रयास में अमेरिका का साथ दे रहे हैं। ईरान पर दोबारा सैन्य हमले का विकल्प भी खुला रखा गया है।
महत्वपूर्ण घटनाएं
पाकिस्तान में 21 घंटे चली अमेरिका-ईरान वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हुई।
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को अपने नियंत्रण में बताते हुए जहाजों से टोल वसूलने की बात कही।
ईरान में जासूसी के आरोप में करीब 50 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
इजराइल के मंत्री बेन गविर के अल-अक्सा मस्जिद दौरे पर जॉर्डन ने विरोध जताया।
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