अचानक ऐसा क्‍या हुआ कि चांदी चढ़ गई और सोने का दाम सरक गया?

NFA@0298
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द लेंस। भारतीय कमोडिटी बाजार में सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। हाल के दिनों में लगातार बढ़ोतरी के बाद निवेशकों ने बड़े पैमाने पर लाभ कमाने की रणनीति अपनाई, जिससे कीमतों पर दबाव पड़ा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर चांदी के दाम अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से लगभग 3 फीसदी तक लुढ़क गए, जबकि सोने की चार दिनों की लगातार तेजी का दौर थम गया।

सोमवार को शुरुआती कारोबार में चांदी ने 2,54,174 रुपये प्रति किलोग्राम का नया ऐतिहासिक उच्च स्तर छुआ, लेकिन ऊपरी स्तरों पर टिक नहीं सकी। निवेशकों की मुनाफावसूली से कीमतें तेजी से गिरावट की ओर बढ़ीं। एमसीएक्स पर चांदी का वायदा मूल्य 7,124 रुपये यानी 2.97 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,32,663 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर पर पहुंच गया।

गौर करने वाली बात है कि पिछले एक हफ्ते में चांदी में करीब 15.04 प्रतिशत (31,348 रुपये) की अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज हुई थी, जिसके बाद तकनीकी सुधार की संभावना जताई जा रही थी। हालांकि, एक घंटे के भीतर चांदी के दाम 21,000 रुपये तक गिरने की खबरें भी आईं, जो ओवरहीटेड रैली के बाद संतुलन बहाल होने का संकेत देती हैं।

इसके विपरीत 99.9 प्रतिशत शुद्ध सोने की कीमत अपने उच्चतम स्तर से 500 रुपये गिरकर 1,41,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। पिछले सत्र में यह 1,500 रुपये चढ़कर 1,42,300 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए रिकॉर्ड पर पहुंची थी।

सोने में चार दिनों की तेजी रुक गई और बाजार में सुस्ती छाई रही। सोना मजबूत खुला, लेकिन जल्द ही लाभ कमाने के दबाव में आ गया। वायदा मूल्य 1,497 रुपये यानी 1.07 प्रतिशत गिरकर 1,38,376 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।

शुक्रवार को ही सोने ने 1,40,465 रुपये प्रति 10 ग्राम का नया शिखर बनाया था। मनीकंट्रोल और इकोनॉमिक टाइम्स के आंकड़ों के अनुसार, एमसीएक्स पर सोना 1,35,167 से 1,37,909 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच कारोबार कर रहा था, जिसमें 3.36 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज हुई।

कीमती धातुओं के ‘ओवरबॉट’ क्षेत्र में पहुंचने से बाजार विशेषज्ञ सतर्क हैं। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी के हवाले से अमर उजाला के अनुसार, यूरोपीय सत्र में सोने-चांदी में रिकॉर्ड ऊंचाई से गिरावट आई, जो मुख्यतः तेज रैली के बाद मुनाफावसूली का नतीजा है। लंबे समय के चार्ट पर दोनों धातुएं ओवरबॉट स्थिति में हैं, जो आगे सुधार की जरूरत बताता है। महीने और साल के अंत में पोर्टफोलियो समायोजन से और दबाव पड़ सकता है।



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