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नई दिल्ली। Cell Broadcast System: देश के करोड़ों मोबाइल फोन पर अब जब एक साथ सायरन बजे तो चौंकिएगा मत तो सचेत हो जाएइगा। क्योंकि हो सकता है यह किसी बड़ी आपदा का अलर्ट हो। शनिवार 11.45 मिनट पर जब देश भर में सेल फोन पर इसी तरह का अलर्ट आया तो लोगों की यही प्रतिक्रिया थी।
साथ ही स्क्रीन पर आए मैसेज पढ़ने के बाद साफ हुआ कि यह सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम से जुड़ी एक तरह की मॉकड्रिल थी। मैसेज में लिखा था, ‘भारत ने स्वदेशी तकनीक का उपयोग करते हुए सेल ब्रॉडकास्ट सेवा शुरू की है, जिससे नागरिकों को आपदा की तत्काल सूचना मिल सकेगी। सतर्क नागरिक, सुरक्षित राष्ट्र। इस संदेश को प्राप्त करने पर जनता को कोई कार्रवाई करने की आवश्यकता है। यह एक परीक्षण संदेश है। भारत सरकार।’
हालांकि यह इस तकनीक का टेस्ट दो साल जारी है। द लेंस के इस संवाददाता के मोबाइल पर भी यह संदेश अप्रैल महीने ही कई बार आ चुका है। इस बार यह अखिल भारतीय स्तर पर किया गया है।
सेल ब्रॉडकास्ट (Cell Broadcast Service) एक आधुनिक तकनीक है जो पारंपरिक SMS से काफी अलग काम करती है। इसमें अलर्ट एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र जैसे किसी जिले या राज्य के सभी मोबाइल फोनों पर एक साथ भेजा जाता है।
इसमें नेटवर्क पर बोझ नहीं पड़ता, भले ही लाखों लोग एक साथ इस्तेमाल कर रहे हों। संदेश तुरंत और बिना किसी देरी के पहुंचता है। क्षेत्र-विशेष में अलर्ट भेजा जा सकता है।
यह प्रणाली C-DOT द्वारा विकसित SACHET प्लेटफॉर्म का हिस्सा है, जो दूरसंचार विभाग (DoT) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सहयोग से चल रही है।
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस उपलब्धि पर कहा कि भारत ने आपदा प्रतिक्रिया नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने बताया कि इस मोबाइल-आधारित इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम की देशभर में टेस्टिंग की गई, जिसमें एक साथ 12 करोड़ से ज्यादा यूजर्स तक संदेश पहुंचा।
भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में चक्रवात, बाढ़, भूकंप या औद्योगिक दुर्घटनाओं जैसी आपदाओं में समय पर चेतावनी देना जान बचाने का सबसे बड़ा हथियार है। पहले SMS या अन्य माध्यमों से अलर्ट भेजने में देरी हो सकती थी या नेटवर्क जाम हो जाता था। नई सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक इन समस्याओं को दूर करती है और नागरिकों को तुरंत सूचित कर पाती है।
सरकार का कहना है कि यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। परीक्षण के दौरान लोगों को घबराने की बजाय इसे समझने और भविष्य की आपदाओं के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है।
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