
संसद का विशेष सत्र बुलाने पर कांग्रेस ने बीजेपी पर लगाया ये आरोप
04-Apr-2026 8:45 AM
कांग्रेस ने कहा है कि 16, 17 और 18 अप्रैल को बुलाया गया संसद का विशेष सत्र आदर्श आचार संहिता का साफ़ उल्लंघन है.
पार्टी का आरोप है कि इसका उद्देश्य पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनावों को प्रभावित करना है.
कांग्रेस ने संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन को लेकर भी जल्दबाज़ी के ख़िलाफ़ चेतावनी दी. पार्टी का कहना है कि यह एक संवेदनशील मुद्दा है और बिना पर्याप्त विचार के किया गया संशोधन तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों के लिए नुकसानदेह हो सकता है.
दिल्ली में प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान पार्टी के सीनियर नेता जयराम रमेश ने बताया कि संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर महिला आरक्षण विधेयक से जुड़े संशोधनों पर चर्चा की इच्छा जताई थी.
जयराम रमेश के मुताबिक़, खड़गे ने जवाब में सुझाव दिया कि अलग-अलग पार्टियों से मिलने के बजाय सरकार को 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए, जब पांच राज्यों में चुनाव प्रक्रिया पूरी हो जाएगी.
उन्होंने कहा कि 24 मार्च को विपक्षी दलों ने भी सर्वसम्मति से यही मांग की थी कि चुनावों के चलते सभी पार्टियां व्यस्त रहेंगी, इसलिए बैठक बाद में हो.
जयराम रमेश ने बताया कि 26 मार्च को फिर से किरेन रिजिजू ने पत्र लिखकर चर्चा की बात दोहराई, लेकिन खड़गे ने एक बार फिर सर्वदलीय बैठक बुलाने पर ज़ोर दिया.
कांग्रेस का आरोप है कि विपक्ष की इस स्पष्ट मांग के बावजूद सरकार ने ‘मनमाने और एकतरफ़ा’ तरीके़ से 16-18 अप्रैल के बीच विशेष सत्र बुलाने का फै़सला कर लिया, जब दोनों राज्यों में चुनाव प्रचार अपने चरम पर होगा.
पार्टी ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही पारित हो चुका है और उस समय भी कांग्रेस ने मांग की थी कि इसे 2024 के आम चुनाव से लागू किया जाए.(bbc.com/hindi)


