युद्ध में मारे गए बच्चे!

NFA@0298
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इस्राइल और अमेरिका के हवाई हमले में निशाना बने ईरान (Iran) के तटीय शहर मिनाब में स्थित गर्ल्स एलिमेंट्री स्कूल में हुई 160 से अधिक लड़कियों की मौत हमारी सामूहिक स्मृति को झकझोर कर रख देने वाली घटना है।

यह घटना बार बार दोहराए जाने वाले उस स्मरण पत्र की तरह है, जिसके मुताबिक युद्ध में सर्वाधिक नुकसान बच्चों और निर्दोष नागरिकों का होता है।

ड्रोन और प्रेशिजन गाइडेड मिसाइलों (पीजीए) के इस दौर में जब हजारों किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को पूरी सूक्ष्मता से निशाना बनाने वाली तकनीक मौजूद हैं, पूछा जा सकता है कि मिनाब स्थित इस स्कूल की बच्चियां किनकी दुश्मन थीं?

युद्ध क्षेत्र से आ रहे ब्योरे बता रहे हैं कि इस्राइल और अमेरिका के युद्ध तंत्र ने पहले से तेहरान के उस इलाके के कैमरों को हैक कर रखा था, जहां ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई का दफ्तर था। उनकी आवाजाही पर नजर रखी गई और वहां लगे कैमरों ने डाटा एकत्र कर उसे तेल अवीव स्थित सर्वर तक भेजा था। यानी हमलावर को पता है कि वे किसे निशाना बना रहे हैं।

जाहिर है, युद्धोन्माद में डूबे इस्राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि संयुक्त राष्ट्र के कायदों और युद्ध संबंधी अंतरराष्ट्रीय नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए आखिर मिनाब के स्कूल पर हमला क्यों किया गया?

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट बताता है कि अक्टूबर, 2023 से इस्राइल और फलस्तीन के बीच चल रही जंग में गाजा में 21 हजार बच्चे मारे जा चुके हैं।

इतिहास किसी मोड़ पर तो पूछेगा कि आखिर बच्चों को निशाना बनाने वाले कौन थे? यह सवाल उनसे भी होगा, जो ऐसे हर हमले के समय चुप रहे।



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