बस्तर में 108 नक्सलियों का सामूहिक सरेंडर: 3.61 करोड़ कैश, 1 किलो सोना और 101 हथियार सौंपे

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जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान (Anti Naxal Operation) के बीच बुधवार को बड़ी सफलता मिली। जगदलपुर में 108 नक्सलियों ने सामूहिक रूप से आत्मसमर्पण कर दिया। सरेंडर करने वाले नक्सलियों पर कुल 3 करोड़ 95 लाख रुपए का इनाम घोषित था।

सरेंडर के दौरान नक्सली अपने साथ बड़ी मात्रा में नकदी, सोना और हथियार लेकर पहुंचे। उन्होंने पुलिस को 3 करोड़ 61 लाख रुपए नकद, करीब 1.64 करोड़ रुपए मूल्य का लगभग 1 किलो सोना और 101 हथियार सौंप दिए। इस दौरान कार्यवाहक डीजीपी अरुण देव गौतम भी मौजूद थे।

पुलिस अधिकारियों ने सरेंडर करने आए नक्सलियों का रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत किया। इस दौरान कई नक्सली हाथ में संविधान की किताब लिए दिखाई दिए। कार्यक्रम में बस्तर संभाग के सातों जिलों के एसपी और राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

पुलिस के मुताबिक, सरेंडर करने वाले नक्सली लंबे समय से दंडकारण्य क्षेत्र में सक्रिय थे। वे अपने साथ जो नकदी और सोना लेकर आए हैं, वह कथित तौर पर लेवी वसूली और अन्य गतिविधियों के जरिए इकट्ठा किया गया था।

अब पुलिस इन नक्सलियों से पता करेगी कि सोना कहां से आया, किन-किन स्रोतों से पैसा जुटाया गया और संगठन के वित्तीय नेटवर्क कैसे काम करते थे।

सरेंडर के दौरान नक्सलियों ने पुलिस को कई आधुनिक और पारंपरिक हथियार भी सौंपे। इनमें प्रमुख रूप से         7 AK-47 राइफल, 10 इंसास राइफल, 5 एसएलआर राइफल, 4 एमजी राइफल, 20 .303 राइफल, 11 बीजीएम लॉन्चर, अन्य हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया गया है।

कार्यवाहक डीजीपी गौतम ने बताया कि सरेंडर करने वाले नक्सलियों को राज्य सरकार की पुनर्वास और आत्मसमर्पण नीति का लाभ दिया जाएगा। साथ ही उन्हें मुख्यधारा में जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। पुलिस ने बाकी नक्सलियों से भी अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करें।

इधर, इसी दौरान कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा इलाके में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ की खबर भी सामने आई है।

करीब आधे घंटे तक दोनों तरफ से फायरिंग हुई। हालांकि अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। कांकेर एसपी निखिल राखेचा ने मुठभेड़ की पुष्टि की है। इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है।

एक दिन पहले गृह मंत्री विजय शर्मा ने विधानसभा में कहा है कि बस्तर में तैनात अधिकांश केंद्रीय बलों को 31 मार्च 2027 तक वापस बुलाने की योजना है। उन्होंने बताया कि राज्य में सशस्त्र नक्सलवाद के समापन के लिए 31 मार्च 2026 की समयसीमा तय की गई है। इसके बाद सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करते हुए केंद्रीय बलों की चरणबद्ध वापसी की जाएगी।

बस्तर में एक साथ 108 नक्सलियों का सरेंडर सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि दूसरी ओर कांकेर में हुई मुठभेड़ यह भी संकेत देती है कि क्षेत्र में अभी नक्सल गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं और सुरक्षा बलों की कार्रवाई लगातार जारी है।

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