खबर हेमंत तिवारी,,,,,,,,,
पाण्डुका/अंचल के ग्राम पंचायत गाड़ा घाट में एक गो पालक किसान को उस वक्त गहरा घात लगा जब उसकी बहुमूल्य गौरी नामक गाय की मौत पहले बच्चे को जन्म देने के कुछ समय बाद हो गई। इस पर दुखी गो पालक किसान ने पशुधन विभाग के एक कर्मचारी के ऊपर लापरवाही का आरोप लगाया है। मामला कुछ इस प्रकार है ग्राम गाड़ाघाट में बेदू राम निषाद ने बताया कि बीते लगभग 5 रोज पहले उसकी गौरी नामक गाय जो गाभिन थी और पहले बार अपने बच्चे को जन्म दी, बच्चा जन्म देने के बाद गर्भाशय के कुछ अंश बाहर निकल आया जिसको मैं समझ नहीं पाया और गाय की तकलीप को देख मैने कुछ जानकार लोगों से जानकारी ली फिर पशुधन विभाग के कर्मचारी जितेंद्र निषाद नंबर मिला और संपर्क कर इसकी जानकारी दी लगभग 4:30 बजे फोन कर पूरी घटना बताई,मै समाज के काम से कहीं बाहर था और उसे तुरंत घर में पहुंचने की निवेदन किया,और कर्मचारी ने तुरंत किसान के घर में आकर इलाज करने का आश्वासन दिया पर कर्मचारी झूठा आश्वासन देता रहा मेरे पास पहुंचा ही नहीं और इस कर्मचारी का राह देखते देखते अंततः पहली बार मां बनी मेरी गौरी गाय ने दम तोड़ दिया ।

इस प्रकार किसान बैदूराम के ऊपर मानो पहाड़ टूट पड़ा हो अपने इस गाय की मौत से वाह दो दिन तक खाना नहीं खाया और व्याकुल रहा और इस प्रकार पशुधन विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही से गाय की मौत होना बताया । किसान बेदू राम ने बताया मेरी गाय मेरे लिए बहुत कीमती थी। मैंने बड़े लाड प्यार से इसको पाला था और उसे गौरी बुलाने पर कहीं भी रहती मेरे पास आ जाती थी। मेरे लिए मेरे बच्चों के समान थी ।पर मुझे पशुधन विभाग के कर्मचारी जितेंद्र निषाद ने गुमराह करता रहा नहीं आया, सही समय में बता देता तो सरकारी नहीं तो किसी निजी पशु डॉक्टर से इलाज करा लेता ।मुझे धोखा में रखा और नहीं आया मै अपनी गाय को किसी तरह बचा लेता आज जो बछड़ा जन्म लिया है उसको मैं दूसरे घरों से दूध लाकर पिला पिलाकर पाल रहा हूं और हर दिन जब भी मैं इसने बछड़ा को दूध पिलाता हूं तो मेरे आंसू निकल जाते हैं। ,,,,,,
वही इस तरह जितेंद्र निषाद नामक कर्मचारी किसी अतरमरा कार्यालय के दीवान कर्मचारी को गो पालक किसान के घर भेजने की बात कह कर एक दूसरे के ऊपर पल्ला झाड़ते रहे और अंततः एक गौ वंश की मौत हो गई।
,,,कुछ जानकार बताते हैं कि पशुधन विभाग पांडुका के चिकित्सा अधिकारी मुख्यालय में नहीं रहते और यहां के कर्मचारियों की बहुत लापरवाही करते है कि समय पर किस जब बुलाते हैं तो नहीं पहुंचते इस प्रकार पांडुका अंचल के गो पालको को और किसानों को विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों का लाभ नहीं मिल रहे हैं ।जिस कारण निजी पशु चिकित्सको पर जायदा विश्वास करते है।बल्कि कुछ चुने हुए चिन्हांकित किसानों को ही पशु धन विभाग के कई योजनाएं और अपनी पूरी सेवा का लाभ दे रहे हैं। आम जनता के लिए जो कर्तव्य के तहत कार्य करना चाहिए उसे कर्तव्य पर यहां के कर्मचारी अधिकारी खरा नहीं उतर रहे हैं। ऐसे में किसान बेदराम मुआवजा की मांग कर रहे और लापरवाह कर्मचारियों और अधिकारियों के ऊपर कारवाई की मांग कर रहे हैं। साथ ही वह पशु धन विभाग के जिला अधिकारी और कलेक्टर के पास अपने मृत गाय के बछड़ा को ले जाकर छोड़ने की बात कह रहे हैं जिसकी जिम्मेदारी विभाग और जिला प्रशासन की होगी।
,,,,,,,,,,,,
वही इस बारे में जब पशुधन विभाग के कर्मचारी जितेंद्र निषाद से बात किया गया तो उन्होंने बताया कि यह गाड़ाघाट गांव मेरा एरिया नहीं आता मुझे किसान फोन लगाया था मैं किसी कारणवश नहीं आ पाया पर मैं इस बात की जानकारी संबंधित कर्मचारी अतरमरा वाले दीवान को दे दी थी ।वो नहीं पहुंचा उसमें मैं क्या करु।
,,,,,, वही इस बारे में पशुधन विभाग के चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर सुरेंद्र चंद्राकर से पूछे जाने पर बताया कि इस मामले की जानकारी मुझे नहीं है मैं आपके पास कर्मचारियों को भेज देता हूं क्या मामला है आपको बता देंगे ,और भी मैं पता कर लेता हूं।

