अंततः भारत ने दी 183 नौसैनिकों के साथ ईरानी जहाज को शरण, उधर ईरान ने श्रीलंका को कहा- दिल से शुक्रिया

NFA@0298
4 Min Read


नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली

बड़ी खबर कोच्चि से आ रही है। भारत ने ईरान के एक नौसैनिक जहाज को शरण देने का फैसला किया है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार श्रीलंका के दक्षिण में आईरिस देना पर तारपीडो से हमले के घटना से कुछ दिन पहले, ईरान ने भारत से अपने जहाज आईरिस लावन को शरण देने का अनुरोध किया था। जिसे स्वीकार कर लिया गया।

यह जहाज भी विशाखापत्तनम में अंतरराष्ट्रीय फ्लीट में शामिल होने आया था। सूत्रों के अनुसार इसे शरण देने का अनुरोध 28 फरवरी को प्राप्त हुआ था, जिसमें बताया गया था कि जहाज में तकनीकी खराबी आ जाने के कारण कोच्चि में उसका डॉकिंग करना अत्यावश्यक है। 1 मार्च को डॉकिंग की अनुमति दी गई।

आईरिस लावन 4 मार्च को कोच्चि में डॉक हो गया। इस संदर्भ में, इसके 183 चालक दल के सदस्य वर्तमान में कोच्चि स्थित नौसेना सुविधाओं में ठहरे हुए हैं।

महत्वपूर्ण है कि सरकार जहाज को शरण दिए जाने के बाद पांच दिनों तक खामोश रही। जबकि ईरानी जहाज पर हिंद महासागर में हमले को लेकर उस पर लगातार आरोप लगते रहे।

दरअसल यह पूरा घटनाक्रम उस समय शुरू हुआ जब हिंद महासागर के अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत IRIS Dena पर हमला कर दिया।

यह जहाज भारत के विशाखापट्टनम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद वापस लौट रहा था। हमले के वक्त जहाज निहत्था बताया जा रहा है और उस पर करीब 130 ईरानी नौसैनिक सवार थे।

अचानक हुए हमले में जहाज बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और कुछ ही देर में हिंद महासागर में डूब गया। इस घटना में कई ईरानी नौसैनिकों की मौत हो गई, जबकि बड़ी संख्या में लोग समुद्र में फंस गए।

इस बीच श्रीलंका की नौसेना ने राहत और बचाव अभियान चलाया। श्रीलंकाई नेवी ने समुद्र में फंसे 32 ईरानी नौसैनिकों को सुरक्षित बचा लिया, जबकि इस हादसे में 87 शव भी बरामद किए गए।

इसी दौरान पास में मौजूद ईरान का एक और जहाज IRIS Bushehr भी तकनीकी खराबी के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहा था। उस जहाज पर 208 क्रू मेंबर्स और कैडेट्स सवार थे, जो हिंद महासागर के बीच फंस गए थे।

खतरे को देखते हुए श्रीलंका की नौसेना ने मानवीय आधार पर उन्हें रेस्क्यू किया और सुरक्षित बंदरगाह तक पहुंचाया। साथ ही जहाज IRIS Bushehr को त्रिंकोमाली बंदरगाह ले जाने का फैसला किया गया।

इस मानवीय मदद के लिए ईरान ने श्रीलंका का खुलकर धन्यवाद भी दिया।

इसके बाद खबर आई कि भारत ने ईरान के आईरिस लावन को शरण देने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया था।

भारत ने इससे पहले तक ना अपने पुराने दोस्त ईरान पर अमरीका और इज़राइल के हमले का विरोध किया  ना ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई की हत्या पर श्रद्धांजलि के दो शब्द ही कहे। इसे लेकर भारत सरकार और खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आलोचनाओं का भी सामना करना ही पड़ रहा था। इस घटना के बाद भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्थिति और असुविधाजनक हो गई ।

लेकिन अब कम से कम भारत ने जिस तरह ईरानी युद्धपोत और नौसैनिकों को देश में शरण देने का ऐलान किया है इसे एक मानवीय पहल और कूटनीति की दिशा में देर से उठाया गया सही कदम कहा जा सकता है।

यह भी पढ़ें: ईरान का सीजफायर से इंकार, जमीनी हमले की खुली चुनौती



Source link

Share This Article
Leave a Comment